श्री भवानी शंकर आश्रम में शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस का आयोजन

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रूडकी: श्री भवानी शंकर आश्रम रूडकी में 21 नवंबर से 27 नवंबर तक शिव महापुराण कथा, रुद्राभिषेक और दैनिक यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। आज शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस,
श्री श्री 1008 महा मंडलेश्वर स्वामी हेमानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि नारद मोह को भगवान ने किस प्रकार दूर किया। जब नारद मुनि को अहंकार हुआ, तब भगवान ने अपनी लीला के द्वारा उनका अहंकार तोड़ा। भगवान् अपने भक्तों में अभिमान को नहीं पनपने देना चाहते क्यूंकि अभिमान भक्तों को भगवान्ा से दूर कर देता है। तत्पश्चात स्वामी हेमानंद सरस्वती जी महाराज ने भगवान शिव और सती के विवाह का सुन्दर प्रसंग सुनाया। इस कथा के माध्यम से उन्होंने समझाया कि पति-पत्नी के बीच विश्वास और सामंजस्य से ही गृहस्थ आश्रम चलता है। सती को अपने इष्ट महादेव की बातों पर संदेह हो गया जिस कारण उन्हें अपना शरीर त्यागना पड़ा। सती की मृत्यु के पश्चात जब महादेव उनके शरीर को लेकर जगह जगह जा रहे थे तब 51 जगह सती के शरीर के टुकड़े गिरे और उन स्थानों पर 51 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ। तत्पश्चात तारकासुर नामक असुर के वध हेतु महादेव और माँ पार्वती का विवाह हुआ जिसके परिणामस्वरूप कार्तिकेय का जन्म हुआ। कार्तिकेय के ही हाथों तारकासुर वध हुआ।
बता दें कि श्री भवानी शंकर आश्रम रूडकी में शिव महापुराण कथा, रुद्राभिषेक और दैनिक यज्ञ का आयोजन 21 नवंबर से 27 नवंबर कर किया जा रहा है।
यह आयोजन श्री महंत रीमा गिरी जी और श्री महंत त्रिवेणी गिरी जी के पर्यवेक्षण में हो रहा है। विशेष सानिध्य साध्वी डॉ। निर्मला गिरी जी और श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी मैत्रेयि गिरी जी महाराज का रहेगा।

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