देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य में अब तक भू-माफिया सरकारी जमीनों की बंदरबाट कर रहे थे लेकिन अब उनकी नजर चर्च की जमीनों पर भी आ गयी है। सरकारी जमीन तो संबंधित जिले के जिलाधिकारी बचाने के लिये एडी चोटी का जोर लगा रहे है और जो जमीन सरकार की मिल रही है उसे वापस सरकार में मर्ज कर रहे हैं। जबकि चर्च की जमीनों को बचाने का अब तक किसी ने प्रयास नहीं किया था लेकिन आज डायोसेस ट्रस्ट एसोसिएशन एक उत्तराखण्ड और लखनऊ के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने जमीनों को बचाने का बीड़ा उठा लिया हैं। उन्होंने राजधानी दून में मीडिया कर्मियों को जानकारी देते हुए बताया कि चर्च की जमीनों पर कुछ भू-माफियाआें की नजर है और वह इन जमीनो की खरीद फरोख्त भी कर रहे है। उन्होंने बताया कि डायोसेस ट्रस्ट एसोसिएशन को 11 जून 1929 को रॉयल चार्टर द्वारा शामिल किया गया था और चर्च ऑफ इंडिया द्वारा शासित किया गया था। अधिनियम 1927 । उन्होंने बताया कि कुछ स्वयंभू अध्यक्ष, सचिव गलत तरीके से लाभ कमान और चर्च ऑफ इंडिया को धोखा देने और चर्च को बेचने के गुप्त उद्देश्य से खुद को एंग्लिकन चर्च सीआईपीबीसी का मालिक बताते है। भारत सरकार, भूमि, संपत्ति जिनका आईसीटी में विलय कर दिया गया है। सरकार के खिलाफ है। भारत सरकार के आदेश 22 दिसम्बर 1956 पत्र संख्या 4409-सी/ आईएक्स-ए-22-एन(1)-1956 सरकार द्वारा के ऊपर लखनऊ 22 दिसम्बर 1956 एवं पत्र दिनांक 1 अप्रैल 1948 क्रमांक ईसीएल 472/डी 2 (बी) सरकार। भारत के रक्षा मंत्रलय द्वारा दिनांक 19 नवम्बर 1931 को पत्र संख्या ईसीएल द्वारा जारी किया गया। वाणिज्य विभाग भारत सरकार द्वारा जारी और फिर से आम जनता को वह यह बताना चाहते है कि कुछ बेईमान व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार की चर्च संपत्ति का सौदा करते समय सतर्क रहे। चर्च ऑफ इंडिया अपने पदाधिकारियों के ऊपर धोखाधड़ी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ अपराधिक और नागरिक मामले दायर कर रहा है। जो खुद को चर्च ऑफ इंडिया का अधिकारी बताते है उनके विषय में चर्च को भी सूचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ ईसाई भी भू-माफिया का साथ दे रहे है। और चर्च ऑफ इंडिया की प्रमुख भूमि, संपत्ति बेचने में सहायता कर रहे है। ऐसे लोगों को उनकी अवैध गतिविधियों से वह रोकेगे और उन्हें जेल भिजवायेगेें।

