आत्मबोध संस्कार शिविर में श्रद्धालुओं ने उठाया धर्मलाभ

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देहरादून। पर्वाधिराज पर्युषण दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व भव्य एवं धार्मिक वातावरण में मनाया जा रहा है। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। प्रातःकाल मंदिरों में घंटियों की मधुर गूंज के बीच श्रीजी का प्रक्षाल, नित्य नियम पूजन एवं दशलक्षण पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके साथ ही आयोजित भव्य आत्मबोध संस्कार शिविर में देहरादून के साथ-साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं।
इस अवसर पर पूज्य आर्यिका पूर्णमति माता जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि उत्तम मार्दव धर्म का अर्थ अभिमान, घमंड और मान कषाय का त्याग करके मन, वचन और शरीर में कोमलता, नम्रता एवं विनम्रता धारण करना है। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की जाती है। यह धर्म व्यक्ति को कुल, रूप, जाति, बल, धन, ज्ञान अथवा पद के कारण उत्पन्न होने वाले अहंकार का त्याग करने की प्रेरणा देता है। माता जी ने कहा कि अहंकार का त्याग होने से मनुष्य के भीतर कोमलता और समता का भाव विकसित होता है। हृदय की कठोरता दूर होकर सभी जीवों के प्रति करुणा, विनय और आत्मीयता का भाव जागृत होता है। मान कषाय के क्षीण होने से व्यक्ति में सच्ची विनम्रता और सर्वप्राणी हित की भावना विकसित होती है। दशलक्षण महापर्व आत्मनिरीक्षण, आत्मशुद्धि और अपने भीतर के विकारों को दूर करने का अवसर है। उत्तम मार्दव धर्म के अवसर पर दोपहर में छोटे बच्चों द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात जैन मिलन एकता, दिगम्बर जैन महासमिति एवं आंचल महिला जैन मिलन के संयुक्त तत्वावधान में गांधी रोड स्थित जैन भवन में रात्रि 8:30 बजे “अब पछताए क्या हो, जब चिड़िया चुग गई खेत” विषय पर प्रेरणादायक नाटिका का मंचन किया गया।
आत्मबोध संस्कार शिविर के अंतर्गत आचार्य भक्ति, सामायिक, शंका समाधान, प्रतिक्रमण, जैन धर्म पर मार्मिक प्रवचन, तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन, महाआरती, दस धर्मों पर प्रवचन, ‘द आर्ट ऑफ सेल्फ-डिस्कवरी’ ध्यान शिविर तथा प्रश्न मंच सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ध्यान शिविर में बा.ब्र. ऋतु दीदी जी ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन एवं आत्म-अन्वेषण के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 18 सितम्बर को दोपहर 2 बजे वर्णी जैन स्कूल के बच्चों द्वारा मंगलाचरण शाम को 8,30 को वर्णी जैन स्कूल द्वारा नाटिका की जाएगी।
उन्होंने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान पूज्य माताजी के सान्निध्य में प्रतिदिन धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें देहरादून के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर जैन समाज, श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति, जैन भवन कार्यकारिणी सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में बाहर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी के पावन सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त किया।

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