विश्व नेत्रदान दिवस – जीते जीते रक्तदान जाते जाते नेत्रदान। नेत्रदान को बनाएं पारिवारिक परंपरा

शिक्षा हरियाणा समाचार

फरीदाबाद . राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, जूनियर रेडक्रॉस तथा गाइडस द्वारा ऑनलाइन कार्यक्रम नेत्रदान महादान चलाया गया। विद्यालय की जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड अधिकारी एवम प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कहा कि वर्तमान में एक व्यक्ति मृत्यु के पश्चात चार लोगों की अंधेरी जिंदगी में उजाला ला सकता है। पहले दोनों आंखों से दो ही लोगों को कोर्निया मिल पाती थी परंतु नई तकनीक आने के बाद से एक आंख से दो कोर्निया प्रत्यारोपित की जा रही है। डी मेक से होने वाला यह प्रत्यारोपण देश के हर बड़े आंखों के हस्पताल में प्रारंभ हो चुका है। इसमें विशेष बात यह है कि व्यक्ति के मरने के बाद उसकी पूरी आंख नहीं बदली जाती मात्र रोशनी वाली काली पुतली ही ली जाती है। व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे तक ही कार्निया प्रयोग में लाया जा सकता है। आई बैंक एसोसियेशन ऑफ इंडिया के अनुसार देश में अभी 25 लाख व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें कार्निया की आवश्यकता है यदि उन्हें समय रहते किसी की कोर्निया मिल जाये तो वह प्रकृति की सुंदरता को देख सकते हैं। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कार्यक्रम में सभी को मृत्युपरांत नेत्रदान को पारिवारिक और सामाजिक परंपरा बनाने के लिए प्रेरित किया। जूनियर रेडक्रॉस काउन्सलर व ब्रिगेड अधिकारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचन्दा ने सभी से मृत्यु उपरांत नेत्रदान करने को पारिवारिक परम्परा बनाने के लिए अपने परिवार, मित्रों और सहयोगियों ब संबंधियों से विचार विमर्श करने का आग्रह किया। प्राचार्य मनचन्दा ने कहा कि मृत्यु उपरांत नेत्रदान कर के ऐसे लोगों के जीवन में, जो ईश्वरीय उपहार से वंचित हैं, में भी प्रकाश फैलाया जा सकता है और एक करे नेत्रदान, दो का उजला करे जहान को चरितार्थ होता किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान बारे में आवश्यकता यह है कि परिवार में, मित्रों और संबंधियों से इस विषय में चर्चा अवश्य की जाए। जीते जीते रक्तदान और जाते जाते नेत्रदान द्वारा हम मिलकर देश और समाज से नेत्रहीनता को समाप्त कर सकते है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने नेत्रदान जागरूकता के लिए प्राध्यापिका शीतल और मोनिका एवम छात्राओं तबिंदा, निशा, अंशिका और काजल की प्रशंसा करते हुए हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त किया।

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