गुरू पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर सद्गुरू को पहचानें: मोरारी बापू

उत्तराखंड गढ़वाल समाचार

तलगजारडा: अध्यात्म के जगत् में अगर कोई सबसे महान दिन है, तो वह गुरू पूर्णिमा का दिन है} तलगजारडा में श्री चित्रकूट धाम में बुधवार को राम कथा के श्रावकों से बात करते समय आदरणीय मोरारी बापू ने सद्गुरू की पहचान के बारे में और सद्गुरू कहने योग्य कौन है, इस पर अपने विचार रखे|
मोरारी बापू ने कहा कि अध्यात्म के जगत में हर एक को मार्गदर्शक और गुरू मिल सकता है| जब उन्हे पूछा गया कि मेरे लिए गुरू कौन है, मै किसे सद्गुरू कहूँ, तो उन्होने कहा कि यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है|
“व्यक्तिगत आस्था के अनुसार मेरे लिए मेरे सद्गुरू ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं| सद्गुरू सभी प्राचीन ग्रन्थों का स्वरूप और उनका सार निचोड़ हैं| जब साधक की गुरू के प्रति श्रद्धा सम्पूर्ण हो जाती है, तब उसका ‘बुद्ध पुरुष’ उसका धर्म, उसकी सम्पत्ति, उसका प्रेम और मुक्ति बनता है,” मोरारी बापू ने कहा|
मोरारी बापू ने आगे कहा कि, जब गुरू के प्रति साधक की श्रद्धा पक्व हो जाती है, तब वह चित्रकूट, मथुरा, वाराणसी और अयोध्या जैसे सबसे पवित्रतम तीर्थ गुरू के चरणों में पाता है| उन्होने कहा कि जो साधकों की सेवा करता है, वह गुरू है और जिसका मन 24 घण्टे अखण्ड ब्रह्म में (ईश्वर) लीन होता है, वह गुरू ब्रह्मचारी है|
इस पवित्र अवसर पर गुरू की विशेषताओं पर और प्रकाश डालते हुए मोरारी बापू ने कहा कि वस्तुत: गुरू अतीत या भविष्य का नही होता है| वास्तव गुरू तो वर्तमान में और अनन्त रूप में होता है| गुरू हमेशा वहाँ हैं, उन्होने जोर दे कर कहा|
साधक को चाहिए कि वह भीतर खोजे और स्वयं को पूछे कि मेरा गुरू कौन है? गुरू बनता कैसे हैं?
श्री चित्रकूट धाम में अपने प्रवचन के दौरान मोरारी बापू ने इस विषय पर विस्तार में अपने विचार रखे और गुरू पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपनी शुभकामनाएँ‌ सभी को- विशेष कर साधकों को दी|
इस दिन का प्रवचन श्री चित्रकूट धाम के युट्युब चैनलर पर भी देखा जा सकता है|

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