विश्व एड्स दिवस पर स्वयं संस्था ने किया कार्यक्रमों का आयोजन

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देहरादून। एड्स दिवस के उपलक्ष में स्वयं संस्था ने चकरोता रोड स्थित फूल चंद नारी शिल्प मंदिर गर्ल्स इंटर कालेज में परिचर्चा ,पोस्टर एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया।इस अवसर पर छात्राओं द्वारा उक्त विषय पर प्रदर्शनी भी लगाई गई। चार्ट, माडल और एलबम के माध्यम से छात्राओं ने इस रोग के कारण एवं उनसे बचने के उपाय पर प्रकाश डाला । इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती शैल बिष्ट ने बताया कि एड्स एच.आई.वी. नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग बारह सप्ताह के बाद ही रक्त की जाँच से ज्ञात होता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है, ऐसे व्यक्ति को एच.आई.वी. पोजिटिव कहते हैं। एच.आई.वी. पोजिटिव व्यक्ति कई वर्षों तक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है, लेकिन दूसरो को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है।
यह विषाणु मुख्यतः शरीर को बाहरी रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाले रक्त में मौजूद टी कोशिकाओं व मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। धीरे- धीरे यह स्थिति हो जाती है कि शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से अपना बचाव नहीं कर पाता और तरह-तरह का संक्रमण से ग्रसित होने लगता है इस अवस्था को एड्स कहते हैं।एच.आई.वी. पोजिटिव व्यक्ति में
गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों का हो जाना , लगातार कई-कई हफ्ते बुखार रहना ,अकारण वजन घटते जाना, मुंह में घाव हो जाना आदि लक्षण प्रमुख रूप से दिखाई पडते है । एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति के साथ सामान्य संबंध से, जैसे हाथ मिलाने, एक साथ भोजन करने, एक ही घडे का पानी पीने, एक ही बिस्तर और कपडो के प्रयोग, एक ही कमरे अथवा घर में रहने, एक ही शौचालय, स्नानघर प्रयोग में लेने से, बच्चों के साथ खेलने व मच्छरों / खटमलों के काटने से यह रोग नही फैलता।
एड्स का कोई उपचार या बचाव का टीका नहीं हैं। हमेशा जीवाणुरहित अथवा डिस्पोजेबल सिरिंज व सुई ही उपयोग में लानी चाहिए।
स्वयं संस्था की उपाध्यक्षा श्रीमती मंजू सक्सेना ने अपने संबोधन में एड्स से बचने के उपायों पर प्रकाश डाला ।एड्स की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ‘हमें बचाव में ही बचाव है ‘को अपने जीवन में चरितार्थ करना चाहिए।एड्स के कारणों को जानकर उससे सतर्क रहना चाहिए जिससे इस भयावह रोग से बचा जा सके । उन्होंने संदेश दिया कि यहां से प्राप्त जानकारी वह अपने परिवार एवं पड़ोस में भी प्रचारित एवं प्रसारित करें । उत्तराखंड की अमूल्य वनस्पतियां जैसे गिलोय, तुलसी, पपीते एवं नीम के पत्ते ,एलोवेरा , हरड़ व सतावर आदि के सेवन द्वारा एड्स रोग से बचाव एवं एड्स रोगी के जीवन प्रत्याशा में वृद्धि की जा सकती है ।
इस मौके पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में कु० इल्मा कक्षा 12 प्रथम,
कु०आरती कक्षा 11 द्वितीय एवं कु०रिंकी कक्षा 12 तृतीय रहीं। भाषण प्रतियोगिता मे कु० लाइवा कक्षा 11 प्रथम,
कु०प्रिया कक्षा 11 द्वितीय रहीं।
स्वयं संस्था द्वारा विजेताओं को पुरस्कृत किया गया । कार्यक्रम का संचालन कु०सुजाता शर्मा ने किया। इस अवसर पर श्रीमती मोना बाली ,श्रीमती रेनु जोशी, डॉ ० उमेश चंद्र, दिनेश जोशी ,श्रीमती शांति बिष्ट, श्रीमती शीतल, श्रीमती सुषमा कोहली, श्रीमती शर्मिला कोहली, कु०कमलेश कन्नौजिया,सुश्री गीता कुमार, श्रीमती सोनाली चौधरी एवं श्रीमती सुधा शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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