विश्व क्षय रोग दिवस – बच्चों को क्षय रोग के प्रति सचेत किया

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राजकीय आदर्श वरिष्ठ माद्यमिक विद्यालय सराय ख्वाजा में विश्व टी बी दिवस पर जूनियर रेड क्रॉस व सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड ने प्राचार्य रविन्दर कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में क्षय रोग (टी बी) के लक्षण और प्रकार बता कर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। जूनियर रेडक्रॉस और ब्रिगेड अधिकारी प्राचार्य रविन्दर कुमार मनचन्दा ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के अनुसार विश्व में दो अरब से ज्यादा व्यक्तियों को लेटेंट टीबी संक्रमण है। सक्रिय टीबी की बात की जाए तो इस अवस्था में टीबी का जीवाणु शरीर में सक्रिय अवस्था में रहता है तथा यह स्थिति व्यक्ति को बीमार बनाती है। सक्रिय टीबी का रोगी दूसरे स्वस्थ व्यक्तियों को भी संक्रमित कर सकता है इसलिए सक्रिय टीबी के रोगी को अपने मुंह पर मास्क या कपड़ा लगाकर बात करनी चाहिए और मुंह पर हाथ रखकर खांसना और छींकना चाहिए। लगातार तीन सप्ताह से खांसी का आना और आगे भी जारी रहना, खांसी के साथ खून का आना, छाती में दर्द और सांस का फूलना, वजन का कम होना और अधिक थकान महसूस होना, शाम को बुखार का आना और ठंड लगना, रात में पसीना आना आदि टी बी के लक्षण है। जब टीबी का जीवाणु फेफड़ों को संक्रमित करता है तो वह पल्मोनरी टी बी कहलाता है। टीबी का बैक्टीरिया 90 प्रतिशत से अधिक केसेस में फेफड़ों को प्रभावित करता है। अन्य लक्षणों में सामान्य रूप से सीने में दर्द और लंबे समय तक खांसी व बलगम होना शामिल हो सकते हैं। कभी कभी पल्मोनरी टीबी से संक्रमित लोगों की खांसी के साथ थोड़ी मात्रा में खून भी आ जाता है। लगभग 25 प्रतिशत केसेस में किसी भी प्रकार के लक्षण
दिखाई नहीं देते हैं। बहुत कम मामलों में संक्रमण धमनी तक पहुंच सकता है जिसके कारण भारी रक्तस्राव हो सकता है। टीबी एक पुरानी बीमारी है और फेफड़ों के ऊपरी भागों में व्यापक घाव पैदा कर सकती है। फेफड़ों के ऊपरी में होने वाली टीबी को कैविटरी टीबी कहा जाता है। फेफड़ों के ऊपरी भागों में निचले भागों की अपेक्षा तपेदिक संक्रमण प्रभाव की आशंका अधिक होती है। मनचन्दा ने बताया कि एचआईवी से पीड़ित लोगों में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी 50 प्रतिशत से अधिक मामलों में पाया जाता है। इसलिए टीबी के रोगी को डॉक्टर के दिशा निर्देश में नियमित रूप से टीबी की दवाओं का सेवन करना चाहिए। रविन्द्र मनचन्दा ने आगे कहा कि डब्ल्यूएचओ का कहना है कि सभी देश अगर ठीक प्रकार से टीबी का इलाज करते रहे तो वर्ष 2030 तक इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस अवसर पर टी बी लाइलाज नहीं है का संदेश भी दिया गया। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने सभी अध्यापकों और जूनियर रेड क्रॉस और सेंट जॉन एम्बुलैंस ब्रिगेड की टी बी उन्मूलन के प्रयासों में सहयोग देने और जागरूकता अभियान चलाने के लिए आभार व्यक्त किया।

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