अंगदान दिवस जे आर सी का मरणोपरांत अंगदान प्रेरणा अभियान

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फरीदाबाद। गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल एन आई टी तीन फरीदाबाद की सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड, जूनियर रेडक्रॉस और गाइड्स ने प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में विश्व अंगदान दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम में मरणोपरांत अंगदान प्रेरणा अभियान चलाया। विद्यालय की जे आर सी एवम ब्रिगेड अधिकारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कहा कि अंगदान ऐसे व्‍यक्ति को अंग के रूप में दिया जाने वाला उपहार है जिसके अंग की बीमारी अंतिम अवस्‍था में हो और जिसे ट्रांसप्‍लांट की आवश्यकता हो।जो व्‍यक्ति अपना अंगदान करता है, उसे ऑर्गन डोनर कहा जाता है, जबकि अंग पाने वाले व्‍यक्ति को रेसिपिएंट कहा जाता है। अंगदान रेसिपिएंट की जान बचाने के लिए महत्‍वपूर्ण होता है,m क्‍यों कि उसके अंग बीमारी या चोट के कारण क्षतिग्रस्‍त हो चुके होते हैं। मानव के कई अंगों और ऊतकों का प्रत्‍यारोपण किया जा सकता है इन में लिवर, किडनी, पैंक्रियाज, दिल, फेफड़ा, आंत, कॉर्निया, बोन मैरो और वैस्‍कुलराइज्‍ड कम्‍पोजिट एलोग्राफ्ट्स, जैसे स्किन, यूटरस, बोन, मसल्‍स, नर्व्‍स और कनेक्टिव टिशूज आदि प्रमुख हैं। प्राचार्य मनचंदा ने कहा है कि कोई भी व्‍यक्ति मृत्यु के बाद ऑर्गन डोनर बन सकता है शरीर के अंग दान करने के लिए प्रयोग हो सकते हैं या नहीं इसका निर्णय चिकित्सालय में होता है क्‍यों कि अंग दान के लिए उचित हैं या नहीं, निर्णय डॉक्टर्स द्वारा किया जाता है। सामान्यतः अंगदान तीन प्रकार से हो सकता हैं ब्रेन डेथ, सर्कुलेटरी डेथ और लिविंग डोनेशन के अवस्था में भी लीवर व किडनी आदि का पार्ट दान कर सकता है। ब्रेन डेथ में आघात के कारण ब्रेन स्‍टेम में खून की आपूर्ति रुक जाती है इसमें व्‍यक्ति सांस लेने या सचेत रहने की क्षमता खो देता है। ब्रेन डेथ और कोमा में अंतर है कोमा में ब्रेन चोटिल हो सकता है उसके द्वारा स्वयं को ठीक करने की संभावना रहती है। सर्कुलेटरी डेथ में हार्ट अटैक के बाद सर्कुलेशन रुक जाता है और व्‍यक्ति को पुनर्जीवित या सक्रिय नहीं किया जा सकता। यदि किसी व्‍यक्ति के परिजन नहीं हैं, तो वह अपने सब से पास के मित्रों या सहकर्मियों को मरने के बाद अपने अंगदान करने के लिए भी कह सकता है। वे लोग अपने अंगों का दान नहीं कर सकते जिन्‍हें कैंसर या एचआईवी, संक्रमण हो। प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि एक डोनर के रूप में रजिस्‍टर होना फिर भी महत्‍वपूर्ण है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कार्यक्रम संयोजिका प्राध्यापिका शीतल, मोनिका एवम सभी छात्राओं का अंगदान के लिए प्रेरणा और जागरूकता अभियान चलाने के लिए अभिनंदन किया।

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