नदियों को नया जीवन देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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देहरादून। रिस्पना और बिंदल नदियों के ऊपर लगभग 6200 करोड़ रुपये की लागत से एलिवेटेड रोड बनाने की योजना है। कहा जा रहा है कि इससे जाम कम होगा और पर्यटन बढ़ेगा। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि मसूरी जाने के लिए पहले से ही कई मुख्य और वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं। ऐसे में इतनी महंगी सड़क परियोजना की जरूरत समझ से परे है।
इन सड़कों के बनने से नदियों का प्राकृतिक बहाव रुकेगा और आसपास के जंगलों को भारी नुकसान होगा। रिस्पना और बिंदल नदियाँ पहले से ही गंदगी और प्रदूषण से बेहाल हैं। अगर इस भारी-भरकम बजट का एक छोटा सा हिस्सा भी इन नदियों को साफ करने और कूड़ा प्रबंधन पर खर्च किया जाए तो शहर को ज्यादा फायदा होगा। कुछ तार्किक लोग कह सकते हैं कि अब इन नदियों में पानी नहीं है सीवर और गंदगी ही भारी पड़ी है लेकिन उनके मुख्य उद्गम में तो अभी भी स्वच्छ जल की गुंजाइश है अगर मुहाने और स्रोत व्यवस्थित कर दिया जाए और उसके मार्ग में आने वाले सभी किनारो पर व्यवस्थित आधुनिक कचरा प्रबंधन तकनीक इस्तेमाल की जाए तो यह मुमकिन है।
इस पैसे से नदियों के किनारे आधुनिक कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाए जा सकते हैं। इससे दोनों नदियाँ पूरी तरह कचरा मुक्त हो जाएँगी। जब नदियाँ साफ होंगी तो उनका जलस्तर सुधरेगा और शहर को बदबू और बीमारियों से मुक्ति मिलेगी।
हजारों करोड़ रुपये बहाने के बजाय अगर कुछ सौ करोड़ रुपये भी समझदारी से सफाई पर लगाए जाएँ तो देहरादून की स्थिति में बड़ा सुधार आ सकता है। साफ और बहती हुई नदियाँ न सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ाएंगी बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी वरदान साबित होंगी। यह नजारा अपने आप में पर्यटकों को आकर्षित करेगा जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
इसलिए पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली इस महंगी सड़क योजना की जगह नदियों को नया जीवन देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पर्यटकों को सिर्फ गाड़ियाँ दौड़ाने का रास्ता देने से ज्यादा जरूरी देहरादून के पर्यावरण को बचाना और शहर को सुंदर बनाए रखना है। तभी दून का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा।

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