श्रीराम जी के मधुर और रहस्यमई वचन सुनकर श्रीसती जी भीतर तक मानों हिल सी गई
श्रीसती जी ने माता सीता जी का रुप धारण कर लिया था। वैसे तो यह किसीके लिए भी, प्रसन्नता का विषय होना चाहिए था, कि कोई नारी, जगत जननी के रुप को धारण करने की चेष्टा रखती है। लेकिन बात अगर वेष धारण करने तक ही सीमित हो, और गुणों को अंगीकार करने की कोई […]
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