विश्व थैलेसीमिया दिवस – थैलेसीमिया से बचाव और उपचार के बारे कार्यक्रम आयोजित

शिक्षा हरियाणा समाचार

faridabad. राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन आई टी तीन फरीदाबाद की जूनियर रेडक्रॉस, गाइड्स और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड ने प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में थैलेसीमिया रोग और इस से बचने के उपायों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड अधिकारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कहा कि थैलेसीमिया बच्चों को होने वाला आनुवंशिक रक्त रोग है इस रोग की पहचान बच्चे में तीन मास बाद ही हो पाती है। इस कार्यक्रम को मनाने का सबसे बड़ा लक्ष्य है लोगों को रक्त संबंधित इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना है। थैलेसीमिया ऐसा रोग है जो बच्चों में जन्म से ही विद्यमान रहता है। तीन माह की आयु के बाद ही इसकी पहचान होती है। इस रोग के विशेषज्ञ बतलाते हैं कि इस रोग में बच्चे के शरीर में रक्त की भारी कमी होने लगती है जिसके कारण उसे बार-बार बाहरी रक्त की आवश्यकता होती है। रक्त की कमी से हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है बार-बार रक्त चढ़ाने के कारण रोगी के शरीर में अतिरिक्त लौह तत्व जमा होने लगता है, जो हृदय में पहुंच कर प्राणघातक सिद्ध होते है।
माता-पिता से अनुवांशिकता के रूप में मिलने वाली इस रोग की विडंबना है कि इसके कारणों का पता लगाकर भी इससे बचा नहीं जा सकता। प्राचार्य मनचंदा और प्राध्यापिका अंशुल ने बताया कि हंसने खेलने और मस्ती करने की आयु में बच्चों और उन के परिजनों को बार बार चिकित्सालयों के ब्लड बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
थैलेसीमिया रक्त रोग है। यह दो प्रकार का होता है। यदि पैदा होने वाले बच्चे के माता-पिता दोनों के जींस में माइनर थैलेसीमिया होता है, तो बच्चे में मेजर थैलेसीमिया हो सकता है, जो काफी घातक हो सकता है। पालकों में से एक ही में माइनर थैलेसीमिया होने पर किसी बच्चे को खतरा नहीं होता। अतः जरूरी यह है कि विवाह से पहले महिला-पुरुष दोनों अपनी जांच करा लें इस से होने वाली संतान थेलेसेमिया से बचाई जा सकती है।थैलेसीमिया पीड़ित के उपचार में पर्याप्त रक्त और दवाइयों की आवश्यकता होती है। इस कारण सभी इसका उपचार नहीं करवा पाते। अस्थि मंजा ट्रांसप्लांटेशन इसमें बहुत कारगर होता है परंतु इसका खर्च बहुत अधिक होता है। देश भर में थैलेसीमिया, सिकल सेल, सिकलथेल, हिमोफेलिया आदि से पीड़ित अधिकांश गरीब बच्चे 8-10 वर्ष से अधिक नहीं जी पाते। इसलिए विवाह पूर्व जांच बहुत आवश्यक है। छात्रा दिव्या, मानसी, कोमल, प्रिया और प्रीति ने पोस्टर के माध्यम से थेलेसिमिया से सतर्क रहने का आग्रह किया। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा, संजय मिश्रा और प्राध्यापिका अंशुल ने छात्राओं के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए अभिनंदन किया

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