वरिष्ठ अधिकारियों के लिए पारिस्थितिकी एवं जैवविविधता से संबंधित रिफ्रेशर कोसर् शुरू

उत्तराखंड गढ़वाल समाचार

देहरादून। सेंट्रल माईन पलानिंग एंड डिजाइन इन्स्टीट्यूट (सी एम पीडी आई), राॅंची, जोकोल इण्डिया लिमिटेड का एक सहायक संस्थानहै, के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए पारिस्थितिकी एव ंजैवविविधता से संबंधित 02 दिवसीय रिफ्रेशर कोसर् भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून मे ंआज से प्रारम्भ हुआ। रिफ्रेशर कोसर् का आयोजन पयार्वरण प्रबंधन प्रभाग, विस्तार निदेशालय, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून द्वारा किया जा रहा है।रिफ्रेशर कोसर् का उद्घाटन श्री अरूण सिंह रावत, महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषदद्वाराकियागया। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में पारिस्थिति की एवं जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने इस अवसर पर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवंशिक्षा परिषद, देहरादून और इसके संस्थानो ंद्वारा कोल इंडिया लिमिटेड (सी आई एल)औरइसकेसहायक संगठनों को पारिस्थितिकी एवं जैवविविधता और समग्र रूप से कोयला खदान पयार्वरण के प्रबंधन में प्रदान की गई सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी। इस अवसर पर, उपमहानिदेशक (विस्तार) ने खनन के संबंध में पारिस्थिकी और जैवविविधता के प्रबंधन के लिए सामयिक  वैज्ञानिक तरीकों की आवश्यकता के बारे में बताया।उन्होंने खनन प्रभावित खेत्रों में मिट्टी और नमी संरक्षण और जैवविविधता के संवधर्न पर ज़ोर देते हुए खनन किए गए क्षेत्रों की उचित पयार्वरण बहाली पर भी जोर दिया।इस अवसरपरभा. वा. अ. शि. प. के उपमहानिदेशक (प्रशासन), उपमहानिदेशक (शिक्षा), उपमहानिदेशक (अनुसंधान), भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के समस्त सहायक महानिदेशक, सचिव, भा. वा. अ. शि. प. व संस्थान के अनेक वैज्ञानिकोंने सी एम पीडीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उद्घाटन समारोह में भाग लिया। उद्घाटन सत्र के बाद, पारिस्थितिकी एवं जैवविविधता के विभिन्न पहलुओ ंको शामिल करत ेहुए कोयला खदान पयार्वरण पर समग्र रूप से ध्यान देने की जरूरत के साथ विभिन्न तकनी की सत्र आयोजित किए जाएंगे।तकनीकी सत्रो ंमे ंएकीकृत जैवविविधता और वन्य जीव संरक्षण योजना, कोयला खनन क्षेत्रों की पयार्वरण बहाली की जरूरत, उपाय एवं हालिया प्रगति, कोयला खान परियोजनाओं की पयार्वरण लेखा परीक्षा और पयार्वरण प्रदशर्न सूचकांक रेटिंग, कोयला खनन में रणनीतिक पयार्वरण प्रभाव आकलन की आवश्यकता और महत्व, कोयला खान क्षेत्र से काबर्न स्टाॅक अनुमान और काबर्न क्रेडिटिंग की संभावनाऐ ंऔर कोयला खदान से संबंधित पयार्वरणीय प्रबंधन हेतु आटिर्फिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग जैसे विषय शामिल किए जाएंगे। रिफ्रेशर कोसर् के दौरान भा. वा. अ. शि. प. एव ंइसके संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ ही पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवतर्न मन्त्रालय, आईआईटी (आई एस एम), धनबाद व सी आई एम एफ आर, धनबाद के प्रख्यात विषय विशेषज्ञों द्वारा संबंधित विषय पर व्याख्यान दिये जाएंगे।उद्घाटन सत्र का संचालन डा0 ए0 एन0 सिंह, सहायक महानिदेशक(पयार्वरण प्रबंधन), विस्तार निदेशालय, भा. वा. अ. शि. प. द्वारा किया गया और धन्यवाद ज्ञापन डा0 विशवजीतकुमार, वैज्ञानिक-ई, पयार्वरण प्रबंधन प्रभाग, विस्तार निदेशालय, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद द्वारा दिया गया।

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